
क्या खाकी का यही है असली चेहरा? बस्ती में एक परिवार का घर में घुसकर पीटने का सनसनीखेज आरोप
'रक्षक ही बन गए भक्षक': बस्ती में गर्भवती महिला का दर्द, पुलिस पर लगाया मारपीट का गंभीर आरोप; बस्ती में पुलिस पर गंभीर आरोप: महिलाओं और गर्भवती के साथ मारपीट, उच्चाधिकारियों से जांच की मांग
खाकी का खौफ: बस्ती में घर के भीतर घुसकर महिलाओं और गर्भवती के साथ बर्बरता, पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
- खाकी का ‘तांडव’: बस्ती में घर में घुसकर गर्भवती महिला और बच्चों से मारपीट, पुलिस बनी ‘भक्षक’
- बस्ती: वर्दी की आड़ में बर्बरता! घर में घुसकर महिलाओं को पीटा, लूटपाट का भी आरोप
- पुलिस की गुंडागर्दी: गर्भवती महिला के पेट पर लात, सराय घाट में खाकी हुई शर्मसार
बस्ती, 11 जुलाई 2026
’रक्षक ही भक्षक बन जाए’—बस्ती के सराय घाट (पोस्ट मिश्रौलिया) की घटना ने पुलिस विभाग के इसी कड़वे सच को एक बार फिर उजागर कर दिया है। शहर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत एक परिवार ने स्थानीय पुलिस पर जो आरोप लगाए हैं, वे न केवल गंभीर हैं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाले हैं। सवाल यह है कि क्या कानून के रखवाले अब कानून को ही अपने पैरों तले कुचलने के लिए स्वतंत्र हैं?
रात का अंधेरा और खाकी का तांडव
पीड़ित परिवार की व्यथा के अनुसार, 10 जुलाई की रात 10 बजे का समय था, जब कोतवाली के 8-10 पुलिसकर्मियों ने घर में घुसकर ऐसी बर्बरता दिखाई जो किसी अपराधी के साथ भी नहीं की जानी चाहिए। शिकायत में कहा गया है कि पुलिस ने महिलाओं, नाबालिग लड़कियों और पुरुषों को निशाना बनाया। सबसे भयावह आरोप पांच माह की गर्भवती महिला निरमा के साथ की गई मारपीट का है। आरोप है कि उसके पेट और पैरों पर लात-घूंसों से प्रहार किया गया, जिससे अब अजन्मे बच्चे की जान पर बन आई है।
लूट और तोड़फोड़ का ‘ऑपरेशन’
पुलिस पर केवल शारीरिक हिंसा ही नहीं, बल्कि लूट और तोड़फोड़ के भी आरोप लगे हैं। पीड़ितों का दावा है कि पुलिस ने घर का टीवी, फ्रिज और अन्य कीमती सामान तहस-नहस कर दिया। यही नहीं, जाते समय चार मोटरसाइकिलें, मोबाइल फोन और जेवर भी ‘जब्त’ कर लिए गए। क्या पुलिस का काम अब घर में घुसकर लूटपाट करना रह गया है? यह वर्दी की आड़ में किया गया संगठित अपराध नहीं तो और क्या है?
छोटी सी नोकझोंक, बड़ी बर्बरता
घटना का सूत्रपात एक मामूली विवाद से हुआ था—नशे में टॉयलेट करने का विरोध। इस विरोध के बाद जो हुआ, वह पुलिसिया दंभ की पराकाष्ठा है। डायल 112 के जाने के बाद स्थानीय चौकी की पुलिस का पहुंचना और उसके बाद यह तांडव कई सवाल खड़े करता है।
उच्चाधिकारियों के सामने बड़ी चुनौती
शनिवार को रीता समेत अन्य महिलाओं ने उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर इंसाफ की गुहार लगाई है। पीड़ित परिवार ने दोषी पुलिसकर्मियों के निलंबन, मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मुकदमे और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। हालांकि इंस्पेक्टर कोतवाली मोती चंद का कहना है कि ‘विधिक कार्रवाई’ की जा रही है, लेकिन जनता का भरोसा इस कार्रवाई पर तब तक नहीं बनेगा जब तक दोषियों के खिलाफ ठोस और त्वरित दंडात्मक कदम नहीं उठाए जाते।
निष्कर्ष:
बस्ती पुलिस की यह करतूत विभाग के लिए एक शर्मनाक अध्याय की तरह है। यदि निर्दोषों को घर में घुसकर पीटा जाएगा, महिलाओं की अस्मिता के साथ खिलवाड़ होगा और गर्भवती की जान जोखिम में डाली जाएगी, तो आम आदमी अपनी रक्षा के लिए किसके पास जाएगा? अब गेंद पुलिस कप्तान और आलाधिकारियों के पाले में है। क्या वे विभाग की साख बचा पाएंगे या फिर खाकी का यह दाग कभी नहीं धुल पाएगा?
पूरे शहर की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या पीड़ित को न्याय मिलेगा या मामले को हमेशा की तरह फाइलों में दबा दिया जाएगा।
















